ज्योतिष में चंद्रमा का परिचय

चंद्रमा ज्योतिष में चन्द्रमा को मस्तिष्क के रूप में देखा जाता है जो स्वभाव से ग्रहणशील है तथा व्यक्ति के अवचेतन, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार को नियंत्रित करता है। यह आंतरिक जीवन की शक्ति को दर्शाता है और व्यक्ति के दूसरों के प्रति व्यवहार को नियंत्रित करता है। चन्द्रमा एक विशेष प्रभाव छोड़ता है जो व्यक्ति के दिमाग में एक खास किस्म की संवेदनशीलता पैदा कर देता है। ज्योतिष में चन्द्रमा को कई नाम दिए गए हैं जैसे रोम के लोगों ने चन्द्रमा को लूना कहा है वहीं यूनानियों ने इसे सेलिन और आर्टेमिस का नाम दिया है। हरिवंश पुराण के अनुसार चन्द्रमा को ऋषि अत्रि का पुत्र माना गया है जिसका पालन-पोषण दस दिशाओं द्वारा किया गया।

ज्योतिष के अनुसार चन्द्रमा मां, यात्रा, दिल, मन, भावनाओं, तरल, बागवानी, परिवर्तन, लोकप्रियता, शैशव, व्यक्तित्व तथा अन्य कई के प्रति हमारी रूचियों और हमारे लगाव को दर्शाता है। चन्द्रमा को ही व्यक्ति की प्रजनन क्षमता, विकास, लंबी यात्रा, मानसिक शांति, स्मृति, माँ बनने और बच्चे के जन्म के लिए जिम्मेदार माना गया है। चन्द्रमा सहज ज्ञान से संबंधित है और यह व्यक्ति को उसके अवचेतन मन से जुड़ने में मदद करता है। यह इसी अवचेतन की वजह से किए जाने वाले हमारे व्यवहार को भी प्रभावित करता है। चन्द्रमा दर्शाता है कि हम स्वयं को तथा दूसरों को किसी विपदा से बचाने के लिए किस तरह से प्रतिक्रिया करते हैं।

चन्द्रमा और इसकी स्थिति व्यक्ति के भावनात्मक अनुभवों को दर्शाती है जो उसे मानसिक तौर पर प्रभावित करते हैं। ये प्रभाव हमारी भावनात्मक प्रवृति के ज़रिए हमारे व्यवहार और आदतों पर भी असर डालते हैं। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चन्द्रमा सही जगह पर बैठा हो तो यह अपने अंतर्गत आने वाले घटकों के प्रभावों को बढ़ा देता है लेकिन अगर यह सही स्थान पर न बैठा हो तो उस व्यक्ति को संबंधित क्षेत्र में सचेत रहना चाहिए।

 

किसी व्यक्ति पर चन्द्रमा अपना प्रभाव किस प्रकार छोड़ता है यह उस व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। कुंडली में बैठा चन्द्रमा ही यह बताता है कि व्यक्ति किस तरह प्रतिक्रिया करता है और उसकी भावनात्मक जरूरतें क्या हैं? कुंडली में जिस स्थान पर चन्द्रमा विराजमान होता है वह दर्शाता है कि व्यक्ति सुरक्षा पाने के लिए किस दिशा या क्षेत्र में काम करेगा। इसी क्षेत्र में व्यक्ति सबसे कमजोर और बचाव की मुद्रा में होता है। इसीलिए इसी क्षेत्र विशेष में व्यक्ति सबसे ज्यादा विकास भी करता है।

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