ज्योतिष में बुध का परिचय

बुध ग्रह मस्तिष्क से संबंधित है। यह ज्ञान तथा बुद्धि देने वाला है जिसका उपयोग करके हम एक स्वस्थ और सार्थक जीवन जीते हैं। बुध विचारों, विभिन्न तरीकों, सूचना और प्रयोगों के जरिए विकास को दर्शाता है। यह संचार, व्याख्या और आत्म-अभिव्यक्ति के कारणों और समझ का प्रतिनिधित्व करता है। बुध किसी व्यक्ति पर क्या प्रभाव छोड़ेगा ये उस व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। व्यक्ति की कुंडली में जिस भी स्थान पर बुध बैठा होगा वही स्थान दिखाएगा कि व्यक्ति अपने मानसिक गुणों का किस तरह और कहां पर इस्तेमाल करेगा। यही वह क्षेत्र है जिसमें व्यक्ति और ज्यादा कार्य करना चाहेगा और सीखना चाहेगा। बुध का स्थान ही दिखाता है कि व्यक्ति किस तरह से लोगों से संपर्क करता है और वह क्या बनना चाहता है।

 

बुध ग्रह का यह नाम शायद इसलिए पड़ा क्योंकि यह आकाश में बहुत तेजी से गति करता है। बुध व्यक्ति के ज्ञान को बढ़ाने वाला ग्रह है। यह ग्रह व्यक्ति को सोचने में, चीज़ों की पहचान करने में तथा विचार व्यक्त करने में मदद करता है। रोमन पौराणिक कथाओं के अनुसार बुध वाणिज्य, चोरी तथा यात्रा का देवता है। ग्रीक भाषा में इसे परमेश्वर का दूत कहा गया है और दो नाम दिए गए हैं- शाम के सितारे के रूप में इसे हर्मिस और सुबह के सितारे के रूप में अपोलो पुकारा जाता है।

 

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार बुध का जन्म चन्द्रमा और देवगुरु बृहस्पति की पत्नी तारा से हुआ। ज्योतिष के अनुसार बुध व्यवसाय, व्यापार, वैज्ञानिक शिक्षा, शिक्षण, खाते, बचपन, बुद्धि, भाषण, व्यवसाय, भेदभाव, मामा, अभिव्यक्ति आदि का प्रतीक है। यह तीक्ष्ण सोच, विभिन्न हितों, निहित चिंता, बदलते स्वभाव से संबंधित है। इसे आंदोलन में प्राण डालने वाला (एनिमेटर) कहा गया है। बुध हमारे नाड़ी तंत्र को भी नियंत्रित करता है और व्यक्ति को गंभीर व अतिसंवेदनशील बनाता है।

 

बुध और इसकी स्थिति व्यक्ति के मानसिक गुणों और उसके संचार के ढ़ंग को दर्शाती है। इसकी स्थिति व्यक्ति की रुचि और उसकी योग्यताओं को प्रकट करती है। अगर कुंडली में बुध की स्थिति सही जगह हो तो यह अपने से संबंधित घटकों के प्रभाव को बढ़ा देता है लेकिन अगर यह सही स्थान पर न हो तो आपको संबंधित क्षेत्र में सचेत रहने की जरूरत है।

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