ज्योतिष में ब्रहस्पति का परिचय

ब्रहस्पति देव

ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति ज्ञान, शिक्षा, धर्म, धन, संतान, भाग्य, स्वास्थ्य, गुरु, बड़े भाई, पति, बुद्धि, शिक्षा, ज्योतिष, तर्क, शास्त्र, भक्ति, त्याग, समृद्धि, विश्वास आदि के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में सम्मान प्राप्ति का भी प्रतीक है। कहा जाता है कि बृहस्पति भाग्य को सुधारता है। यह अपने दायरे में आने वाली सभी चीज़ों के प्रभाव को बढ़ा देता है। इसे किस्मत वालों के ग्रह के रूप में देखा जाता है। बृहस्पति ही जीवन के धार्मिक पहलुओं, सफलता, खुशियों और समझ के लिए जिम्मेदार है।

 

यह बड़े सपनों, ज्ञान और योग्यता का प्रतीक है। बृहस्पति कानून और नैतिक अधिकारों संबंधी मामलों से जुड़ा है। यह चीज़ों को समझने तथा किसी मामले को लेकर राय बनाने के लिए व्यक्ति को मजबूत इच्छाशक्ति प्रदान करता है।
 

ज्योतिष के अनुसार बृस्पति को बहुत लाभदायक ग्रह माना जाता है। यह स्वभाव में शनि से ज्यादा लेकिन मंगल से कम गर्म होता है। यह ग्रह ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। यह स्वतंत्रता, सहनशक्ति और खुशहाली का ग्रह है। इस ग्रह से सभी अच्छी चीजें प्राप्त होती हैं और इसे हंसमुख, उदार और दयालु ग्रह के तौर पर देखा जाता है। स्वतंत्रता के प्रति प्रेम, नए अनुभव, उदारता, व्यापकता, बच्चे, कानूनी न्याय, धर्म और दर्शन से संबंधित सभी चीज़ें यही ग्रह प्रदान करता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है। बृहस्पति को महाऋषि अंगीरा का पुत्र माना जाता है।

बृहस्पति किसी व्यक्ति पर क्या प्रभाव छोड़ेगा यह उस व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। कुंडली में जिस विशिष्ट बिंदु पर यह स्थित होगा वहां व्यक्ति का भाग्य अच्छा होगा। यही स्थान दिखाएगा कि व्यक्ति को किस क्षेत्र में लाभ होगा। बृहस्पति और इसकी स्थिति व्यक्ति के मनोभावों के बारे में भी बताती है। ग्रह की स्थिति ही बताती है कि व्यक्ति को किस क्षेत्र में ज्ञान की जरूरत है। कुंडली में बृहस्पति की उत्तम स्थिति मनुष्य का भाग्य बदल देती है जबकि अगर यह सही जगह न हो तो व्यक्ति को सतर्क रहने की जरूरत है।

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