ज्योतिष में शुक्र देव का परिचय

शुक्र देव ज्योतिष के अनुसार शुक्र पत्नी, विवाह, इंद्रियों के सुख, सुविधा, आरामदायक चीज़ों, जुनून, यौन इच्छाओं, वीर्य, आराम, महिला, विवाह, मनोरंजन, करिश्मा, प्यार, प्रेमिका और वाहन आदि से संबंधित है। यह ग्रह आनंद, सौंदर्य, सामाजिक संबंधों, शादी और अन्य प्रकार की भागीदारी से संबंधित है। यह रोमांस की ओर झुकाव का भी सूचक है। शुक्र हमें प्यार की कीमत, उसकी जरूरत और क्षमता का अहसास करवाता है। यह चीज़ों या व्यक्तियों के प्रति हमारे आकर्षण और चुनाव को दर्शाता है।

किसी व्यक्ति को शुक्र किस हद तक या किस तरह से प्रभावित करेगा यह उस व्यक्ति की कुंडली में शुक्र के स्थान पर निर्भर करता है। कुंडली में किसी खास स्थान पर बैठा शुक्र बताता है कि व्यक्ति ने अपने मूल्यों किस तरह से ग्रहण किया है और उसने किस तरह की विशिष्ट सौंदर्य शैलियों को अपनाया है। किसी व्यक्ति के जीवनसाथी के चुनाव पर भी शुक्र के स्थान का गहरा प्रभाव पड़ता है। यही स्थान बताता है कि हम जीवन के किस क्षेत्र में सहचर्य, भागीदारी, प्यार और शक्तिशाली भावात्मक सबंध प्राप्त करेंगे।

 

शुक्र ग्रह को सबसे चमकीले ग्रह के रूप में जाना जाता है। पहले लोग इसे दो अलग-अलग पिंड समझते थे जिसमें एस्फोरस को सुबह का सितारा और हेस्पेरस को शाम का सितारा कहा जाता था। लेकिन यूनान के खगोलज्ञ इसे बेहतर तरीके से जानते थे। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार शुक्राचार्य को ऋषि भृगु का पुत्र माना जाता है। वे राक्षसों के गुरु हैं। भगवान शिव ने केवल शुक्र को ही मृत-संजीवनी विद्या का ज्ञान प्राप्त करने के योग्य समझा था। इस ज्ञान की मदद से मरे हुए प्राणी को भी जिन्दा किया जा सकता था। रोमन मान्यता के अनुसार वीनस को जूपिटर की बेटी माना गया है, जबकि ग्रीक मान्यताओं के अनुसार इसे ज़ीउस की खूबसूरत बेटी एफ्रोडाइट माना गया है जो प्यार की देवी है।

शुक्र और इसकी स्थिति प्यार के अनुभवों को दर्शाती है। साथ ही यह दर्शाती है कि किसी भी तरह का चुनाव करते समय व्यक्ति की मानसिक जरूरतें किस प्रकार की होंगी। अगर आपकी कुंडली में शुक्र सही जगह पर बैठा हो तो यह संबंधित स्थान के प्रभावों को बढ़ा देता है लेकिन अगर ये सही स्थान पर न बैठा हो तो आपको उस स्थान से संबंधित क्षेत्र में सचेत रहने की जरूरत है।

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