ज्योतिष में सूर्य का परिचय

सूर्य देव सूर्य को सबसे पुराने ग्रहों में से एक के रूप में जाना जाता है। यह जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य असल में कोई ग्रह नहीं है भले ही इसे ज्योतिषीय गणना के लिए ग्रह के रूप में देखा जाता है। सूर्य अहंकार और जागरुकता के साथ-साथ शारीरिक ऊर्जा का भी प्रतीक है। इतिहास में इसे कई नामों से जाना जाता है। सूर्य को कई नामों से जाना जाता रहा है और ऐसा माना जाता है कि संसार को इसका ज्ञान स्वयं ब्रम्हा ने दिया है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सूर्य अदिति और ऋषि कश्यप के पुत्र हैं।

 

ज्योतिष की दृष्टि से एक कुंडली में सूर्य आत्मा, स्वास्थ्य, पिता, शक्ति, रॉयल्टी, सत्ता, शोहरत, नाम, साहस, विरासत, चिकित्सा, आत्म-बोध, प्रभाव, प्रतिष्ठा, ताकत, एहसान, ज्ञान और अन्य कई तथ्यों का प्रतीक है। सूर्य सभी व्यक्तियों की इच्छाशक्ति, ऊर्जा और सौभाग्य को बढ़ाता है। यह व्यक्तियों को बेहतर जीवन जीने में मदद करता है। किसी व्यक्ति, उसके व्यक्तित्व, ज्ञान और प्राप्तियों आदि सभी में सूर्य एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

सूर्य और इसकी स्थिति किसी व्यक्ति की पहचान पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव को दर्शाती है। सूर्य की स्थिति या इसका भाव हम पर विशेष प्रभाव डालता है और एक विशिष्ट व्यक्ति बनने में हमारी मदद करता है। अगर सूर्य कुंडली में सही स्थान पर हो तो यह उपर वर्णित घटकों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए व्यक्ति की जिन्दगी को बदल देता है। किंतु अगर यह सही स्थान पर न हो तो व्यक्ति को सचेत रहने की ज़रूरत होती है।

 

एक व्यक्ति अपने जीवन में जो भी बनना चाहता है, जो कामना करता है, उसकी सोचने की दिशा, उसके मूलभूत प्रश्न, ये सब सूर्य से ही निश्चित होते हैं। यह जीवनशक्ति, नेतृत्व, रचनात्मकता और मानव जाति की विशालता का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य अपनी ऊर्जा किस प्रकार प्रकट करेगा यह सूर्य की स्थिति, उसके भाव (घर या स्थान) जिसमें में वह बैठा है, अन्य ग्रहों पर पड़ने वाला उसका प्रभाव और सूर्य पर पड़ने वाला बाकी ग्रहों के प्रभाव पर निर्भर करता है। किसी व्यक्ति की कुंडली में जिस भी स्थान या भाव में सूर्य बैठा होता है, उसी से पता चलता है कि व्यक्ति किस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएगा। व्यक्ति को आत्म-अनूभूति सूर्य के उसी घर के प्रभाव से होती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *